वांछित मन्त्र चुनें

नकि॒र्ह्ये॑षां ज॒नूंषि॒ वेद॒ ते अ॒ङ्ग वि॑द्रे मि॒थो ज॒नित्र॑म् ॥२॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

nakir hy eṣāṁ janūṁṣi veda te aṅga vidre mitho janitram ||

पद पाठ

नकिः॑। हि। ए॒षा॒म्। ज॒नूंषि॑। वेद॑। ते। अ॒ङ्ग। वि॒द्रे॒। मि॒थः। ज॒नित्र॑म् ॥२॥

ऋग्वेद » मण्डल:7» सूक्त:56» मन्त्र:2 | अष्टक:5» अध्याय:4» वर्ग:23» मन्त्र:2 | मण्डल:7» अनुवाक:4» मन्त्र:2


बार पढ़ा गया

स्वामी दयानन्द सरस्वती

फिर विद्वान् जन ही प्रकट कीर्तिवाले होते हैं, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

पदार्थान्वयभाषाः - हे (अङ्ग) मित्र जिज्ञासु ! जो (हि) जिस कारण (एषाम्) इन के (जनूंषि) जन्मों को (नकिः) नहीं (वेद) जानते हैं (ते) वे उसी कारण (मिथः) परस्पर (जनित्रम्) जन्म सिद्ध करानेवाले कर्म को (विद्रे) पाते हैं ॥२॥
भावार्थभाषाः - जिन विद्वानों के जन्मों को विद्या प्राप्ति करानेवाले न जानते हैं, वे प्रसिद्ध नहीं होते हैं और जो विद्या जन्म पाते हैं, वे ही कृतकृत्य और प्रसिद्ध होते हैं, यह उत्तर है ॥२॥
बार पढ़ा गया

स्वामी दयानन्द सरस्वती

पुनर्विद्वांस एव प्रकटकीर्तयो जायन्त इत्याह ॥

अन्वय:

अङ्ग जिज्ञासो ! ये ह्येषां जनूंषि नकिर्वेद ते मिथो जनित्रं विद्रे ॥२॥

पदार्थान्वयभाषाः - (नकिः) निषेधे (हि) यतः (एषाम्) (जनूंषि) जन्मानि (वेद) विदन्ति (ते) (अङ्ग) सुहृत् (विद्रे) लभन्ते (मिथः) परस्परम् (जनित्रम्) जन्मसाधनं कर्म ॥२॥
भावार्थभाषाः - ये विदुषां जन्मानि विद्याप्रापकाणि जन्मानि न विदुस्ते प्रसिद्धा न भवन्ति ये च विद्याजन्म प्राप्नुवन्ति ते हि कृत्यकृत्याः प्रसिद्धा जायन्त इत्युत्तरम् ॥२॥
बार पढ़ा गया

माता सविता जोशी

(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)
भावार्थभाषाः - विद्वानांचा जन्म विद्याप्राप्ती करविणारा असतो हे जे जाणत नाहीत ते प्रसिद्ध नसतात व जे विद्याजन्म प्राप्त करतात तेच कृतकृत्य व प्रसिद्ध होतात. ॥ २ ॥